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4 August, 2015, 10:16 AM
बारिश के मौसम में मॉरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग वॉक से हो सकता है इंफेकà¥à¤¶à¤¨
"बारिश के मौसम में फूल-पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से पोलेन गà¥à¤°à¥‡à¤¨ निकलता है जो à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का à¤à¤• बड़ा कारण है " यूं तो बारिश का मौसम मन को à¤à¤¾à¤¨à¥‡ वाला होता है, लेकिन इस दौरान मौसम में हà¥à¤ बदलाव आपको बीमार à¤à¥€ कर सकते हैं। इसलिठजरूरी है कि इस दौरान कà¥à¤› खास बातों का खयाल रखा जाà¤à¥¤ आइठजानते हैं इनके बारे में- मारà¥à¤¨à¤¿à¤— वॉक में बरतें सावधानी इस मौसम में मॉरà¥à¤¨à¤¿à¤— वॉक पर जाते समय सावधानी रखें। à¤à¤²à¥‡ ही बारिश नहीं हो रही हो, लेकिन वातावरण में मौजूद नमी à¤à¥€ खतरनाक हो सकती है। बारिश के मौसम में फूल-पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से पोलेन गà¥à¤°à¥‡à¤¨ निकलता है जो à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का à¤à¤• बड़ा कारण है। इसलिठसà¥à¤¬à¤¹ की सैर पर जाते समय मासà¥à¤• लगाकर या मà¥à¤‚ह को ढककर जाना ही उचित होगा। असà¥à¤¥à¤®à¤¾ रोगी रखें धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ मानसून के दौरान वाहन चलाते वकà¥à¤¤ à¤à¥€ विशेष रूप से सजग रहने की जरूरत है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बादलों के मौसम में पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण अधिक होता है। यह जरूरी है कि डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µ करते समय या तो मासà¥à¤• लगाà¤à¤‚ या सà¥à¤•ारà¥à¤« लगा लें। जिन लोगों को असà¥à¤¥à¤®à¤¾ की तकलीफ हो वे घर में à¤à¤¯à¤° कंडीशनर (à¤à¤¸à¥€) का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कम से कम करें। à¤à¤¸à¥€ की हवा से नाक और गला दोनों खराब होने की आशंका रहती है। वैसे तो सावधानी ही उपचार है, लेकिन यदि à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ अधिक बढ़ जाठतो विशेषजà¥à¤ž की सलाह से मरीज नाक में डालने के लिठसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤‡à¤¡ नॉजल सà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡ का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा रोगी à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ और असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के लिठà¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह से ही दवाओं का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करें। इस मौसम में कई घरों में सीलन आने का खतरा रहता है जो à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ को और बढ़ाने का काम करती है। इससे बचाव के लिठपहले ही उचित उपाय करें। कान के लिठनमी सही नहीं बारिश के दिनों में कान की छोटी-छोटी शिकायतें बाद में बड़ी बन सकती है। कान के लिठशà¥à¤·à¥à¤•ता या नमी ठीक नहीं है। इसके अलावा बारिश में à¤à¥€à¤—ने से कान में पानी जाने पर संकà¥à¤°à¤®à¤£ और फंगस होने का खतरा बना रहता है। जब हम ईयरबà¥à¤¾à¤¡ से वैकà¥à¤¸ निकालने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करते हैं तो वह बाहर निकलने की बजाय और अंदर चला जाता है। इससे कान में फंगस व परà¥à¤¦à¥‡ पर चोट लग सकती है और सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकती है। कान से किसी पà¥à¤°à¤•ार का बहाव, दरà¥à¤¦ या अनà¥à¤¯ कोई तकलीफ होने पर विशेषजà¥à¤ž से फौरन संपरà¥à¤• करना ही उचित रहता है। अकà¥à¤¸à¤° लोग कानदरà¥à¤¦ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सरसों के तेल की कà¥à¤› बूंदें डाल लेते हैं। इससे संकà¥à¤°à¤®à¤£ और अधिक बढ़ सकता है इसलिठइसके पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— से बचें। - See more at: http://www.patrika.com/news/body-soul/take-care-of-your-ear-nose-and-throat-during-monsoon-1078674/#sthash.teRWwajf.dpuf
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