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27 July, 2024, 06:29 AM
किन हार्मोंस के बढ़ने से शरीर पर पड़ता है गहरा प्रभाव? जानें कैसे करें कंट्रोल
हार्मोन का इम्बैलेंस होना शरीर में कई समस्याएं पैदा कर सकता है. ऐसे में इसके बारे में जानना बेहद जरूरी है.
High Hormone Level Side Effects: हमारे शरीर में हार्मोन एक अहम भूमिका निभाते हैं. ये छोटे-छोटे रसायन हमारे शरीर के विभिन्न अंगों को संदेश पहुंचाते हैं और उनके काम करने के तरीके को कंट्रोल करते हैं. ये हार्मोन ही हमारे विकास, वृद्धि, मूड, नींद, भूख और कई जरूरी काम को कंट्रोल करते हैं.
हार्मोन का संतुलन बिगड़ने से क्या होता है?
जब हमारे शरीर में किसी हार्मोन की मात्रा ज्यादा या कम हो जाती है, तो इसे हार्मोनल असंतुलन कहते हैं. यह असंतुलन कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि उम्र, तनाव, बीमारी, दवाएं और लाइफ्सटाइल. हार्मोनल असंतुलन के कई लक्षण हो सकते हैं जैसे कि वजन बढ़ना या कम होना, थकान, नींद न आना, मूड स्विंग्स, चिंता, और पाचन समस्याएं.
कौन से हार्मोन शरीर को प्रभावित करते हैं?
थायराइड हार्मोन
थायराइड ग्रंथि द्वारा उत्पादित, ये हार्मोन हमारे शरीर के चयापचय को नियंत्रित करते हैं. जब थायराइड हार्मोन की मात्रा अधिक होती है (हाइपरथायराइडिज्म), तो व्यक्ति को घबराहट, वजन कम होना, दिल की धड़कन बढ़ना और पसीना आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. दूसरी ओर, जब थायराइड हार्मोन की मात्रा कम होती है (हाइपोथायराइडिज्म), तो व्यक्ति को थकान, वजन बढ़ना, ठंड लगना और बाल झड़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं
इंसुलिन
अग्न्याशय द्वारा उत्पादित, इंसुलिन ब्लड में शुगर के लेवल को कंट्रोल करता है. जब इंसुलिन की मात्रा कम होती है या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं होती हैं, तो डायबिटीज हो सकता है. डायबिटीज के लक्षणों में प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान और धुंधली दृष्टि शामिल हैं.
कोर्टिसोल
एड्रिनल ग्रंथियों द्वारा उत्पादित, कोर्टिसोल एक तनाव हार्मोन है, जो शरीर को तनावपूर्ण स्थितियों से निपटने में मदद करता है. लेकिन जब कोर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक ज्यादा रहता है, तो यह हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और मूड से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है.
एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन
ये हार्मोन महिलाओं के प्रजनन तंत्र को नियंत्रित करते हैं. एस्ट्रोजन महिलाओं के लक्षणों जैसे स्तन विकास, मासिक धर्म और गर्भावस्था के लिए जिम्मेदार होता है. प्रोजेस्टेरोन गर्भाशय को गर्भावस्था के लिए तैयार करता है. इन हार्मोन के असंतुलन से पीरियड्स का समय से न आना, बांझपन और मेनोपॉज के लक्षण हो सकते हैं.
हार्मोनल असंतुलन को कैसे संतुलित करें?
फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा का सेवन करें. शुगर, प्रोसेस्ड फूड और कैफीन का सेवन कम करें.
रोजाना एक्सरसाइज करने से हार्मोन का लेवल संतुलित रहता है और तनाव कम होता है.
योग, ध्यान और गहरी सांस लेने जैसी एक्सरसाइज करने से तनाव को कम किया जा सकता है.
रात में कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें.
Source:
https://www.india.com/hindi-news/health/increase-of-which-hormones-has-a-deep-impact-on-the-body-know-how-to-balance-in-hindi-7115736/




