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पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जरूरी है वेस्ट मैनेजमेंट

10 July, 2015, 09:05 AM

पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जरूरी है वेस्ट मैनेजमेंट

आज की फास्ट लाइफ में हर आदमी खुद को अपडेट रखते हुए लग्जीरियस लाइफ जीना चाहता है। ऐसे में पूरे व‌र्ल्ड में इलेक्ट्रानिक गैजेट्स का यूज लगातार बढ़ता जा रहा है। निश्चित ही कम्प्यूटर, लैपटाप और मोबाइल जैसी चीजों ने लोगों को काफी राहत भी पहुंचाई है, लेकिन एक सच यह भी है कि इन नई टेक्नॉलजी के साथ ढेर सारी प्रॉब्लम्स भी आई हैं। ई-वेस्ट इन्हीं में से एक है। यूनाइटेड नेशंस एनवायरमेंट प्रोग्राम (यूएनईपी) ने इसको लेकर वॉर्निग दी है। इस वॉर्निग में कहा गया है कि भारत और चीन जैसी डेवलपिंग कंट्रीज ने ई-वेस्ट को ठीक से रिसाइकल नहीं किया तो इसका पहाड़ खड़ा हो जाएगा। क्या है वेस्ट मैनेजमेंट : वेस्ट मैनेजमेंट कचरे के पुन: इस्तेमाल का तरीका है। इसमें कचरे को नष्ट करने की बजाय इसे रिसाइकिल किया जाता है। हमारे देश में फिलहाल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए पर्याप्त तकनीक नहीं है और न ही इसे लेकर जागरूकता है, लेकिन कचरा पैदा करने में अग्रणी देश होने की वजह से यह जरूरी होता जा रहा है कि हम इसके बारे में जानें। कचरा बढ़ने की प्रमुख वजह जनसंख्या वृद्धि और तेज आर्थिक विकास है। देश में पैदा होने वाला लगभग 80% कचरा कार्बनिक उत्पादों, गंदगी और धूल कर मिश्रण होता है। भारत में बढ़ रही ई-वेस्टेज की मात्रा: विकासशील देश होने के कारण भारत में ई-वेस्टेज की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। उसी अनुपात में उसे दोबारा प्रयोग में लाए जाने की प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है। ई-वेस्ट के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक कचरे जैसे कम्प्यूटर, टीवी, डिस्प्ले डिवाइस, सेलुलर फोन, प्रिंटर, फैक्स मशीन, एलसीडी, सीडी, इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट, सेंसर, अलार्म, सायरन आदि शामिल किए जाते हैं। यूएनईपी की ऑपरेशन काउंसिल की मीटिंग के दौरान जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 10 साल में भारत, चीन और अदर डेवलपिंग कंट्रीज में इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स की बिक्री बहुत तेजी से बढ़ेगी। इस तरह इनसे निकलने वाले ई-वेस्ट का लोगों की हेल्थ पर सीरियस इफेक्ट पड़ेगा. लोगों को जागरूक करना बड़ी चुनौती: घरों, शहरों व फैक्टरियों से निकलने वाले कूड़े का सही तरीके से प्रबंधन न हो पाना एक बड़ी समस्या है। हर देश इसकी समस्या से ग्रसित है। लाख प्रयास के बाद भी इस क्षेत्र में उतना काम नहीं हो पा रहा, जितनी जरूरत है। केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान कार्यक्रम सहित कई एनजीओ इस समस्या से निजात पाने में लगे हैं। इसके लिए वे घर-घर जाकर कूड़ा एकत्र कर रहे हैं। इस कूड़े में जो कुछ ज्वलनशील है उससे एनर्जी तथा जो सड़ने वाला है, उससे वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा है। आज भी लोग जागरूकता के अभाव में कूड़ा अथवा अपशिष्ट जहां-तहां फेंक देते हैं। इससे उनका प्रबंधन नहीं हो पाता, जबकि कई एनजीओ उन्हें इस कूडे़ के एवज में पैसा भी दे रहे हैं। तीन तरह से होता वेस्ट मैनेजमेंट: वेस्ट मैनेजमेंट तीन तरह से होता है। पहले में जमीन में गड्ढा खोदकर कचरे को गाढ़ना। दूसरा तरीका कचरे को एक जगह इकट्ठा कर उसे जलाना और तीसरे में रिसाईकिल कर कचरे का पुन: उपयोग। यह तरीका सबसे ज्यादा लाभदायक है क्योंकि इसमें हम काम में लाई जाने वाली दूसरी चीजें बना सकते हैं। @http://www.bhaskar.com/news/SPLDB-waste-management-is-essential-for-environment-of-protection-5030699-PHO.html

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