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27 March, 2024, 07:25 AM
जानें क्या है 'सरकोपेनिया' जो बढ़ा देता है Type-2 Diabetes का खतरा
मांसपेशियों की कमजोरी को सरकोपेनिया कहा जाता है। उचित जानकारी व सजगता के अभाव में यह बीमारी डायबिटीज टाइप-2 की तरफ धकेलती जाती है। यह बात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली यानी AIIMS में हुए एक अध्ययन में सामने आई है। आइए इसके मुख्य अध्ययनकर्ता से जानें सरकोपेनिया से बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना फायदेमंद हो सकता है।
सरकोपेनिया में व्यक्ति की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
इस स्वास्थ्य स्थिति का वक्त रहते ध्यान न रखा जाए, तो डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
मांसपेशियों की कमजोरी को सरकोपेनिया कहते हैं। उचित जानकारी व सजगता के अभाव में यह बीमारी मधुमेह की तरफ धकेल सकती है
एम्स में हुआ नया शोध
डायबटीज टाइप-2 से पीड़ित मरीज को मांसपेशियों की कमजोरी भी महसूस होती है। कुछ वर्ष पहले तक इस तरह की कमजोरी साठ वर्ष की उम्र में देखी जाती थी। पर अब युवाओं में भी यह समस्या होने लगी है। अगर समय पर जांच हो जाती है तो इसका इलाज आसान हो जाता है। डायबिटीज टाइप-2 से पीड़ित 229 मरीजों पर एम्स, दिल्ली में किए गए हालिया शोध में पाया गया कि इन मरीजों की मांसपेशियां 35-40 की उम्र में ही कमजोर होने लगी हैं।
बता दें कि 20-30 की उम्र में ही शरीर में मांसपेशियां तेजी से बनती हैं और इस समय सबसे अधिक मजबूत होती हैं। ये 60 की उम्र में कमजोर होना शुरू होती हैं लेकिन अब यह स्थिति कम उम्र में भी बन रही है। यह नहीं भूलना चाहिए कि मांसपेशियों को ठीक करने में दवा की कोई विशेष भूमिका नहीं है। यह जीवनशैली से जुड़ी समस्या है। आप संतुलित व प्रोटीन युक्त आहार और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल कर इसे ठीक कर सकते हैं।
कराते रहे जांच
सरकोपेनिया को एडवांस्ड मसल लॉस भी कहा जाता है। अगर आप ढक्कन खोलते समय भी संघर्ष करते हैं और हाथ पर पकड़ नहीं महसूस कर पाते तो ये सब मांसपेशियों की कमजोरी के संकेत हैं। इससे ऊर्जा व सक्रियता कम होने लगती है। गिरने-फिसलने पर हड्डी टूटने का खतरा बढ़ सकता है। यह एक शांत बीमारी या साइलेंट समस्या मानी जाती है यानी पता नहीं चल पाता कि मांसपेशियों का क्षय हो रहा है। इसलिए समय-समय पर मांसपेशियों की क्षमता की जांच करते रहना चाहिए।
मधुमेह व सरकोपेनिया का संबंध
सरकोपेनिया के कारण आप कुछ गतिविधि करने में कठिनाई महसूस करते हैं। स्वाभाविक तौर पर कसरत नहीं कर पाते जिससे मोटापा, वजन बढ़ने का खतरा होता है। यह मधुमेह के जोखिम को बढ़ा देता है। सरकोपेनिया और मधुमेह टाइप-2 का गहरा संबंध है। शरीर का सबसे बड़ा भाग होती हैं हमारी मांसपेशियां। यह ग्लूकोज के बड़े भाग की खपत भी करती हैं। अगर ये कमजोर व क्षतिग्रस्त हैं तो उसका उपयोग पर्याप्त तरीके से नहीं हो पाता। इससे फैटी लिवर या रक्त में मधुमेह का जोखिम बढ़ जाता है।
कसरत से मजबूती
हर रोज साठ मिनट व्यायाम करें। इसमें बीस मिनट मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने वाली कसरत करनी चाहिए।
अगर मांसपेशियां अधिक कमजोर हो रही हैं, तो उसी के अनुसार व्यायाम के तरीके चुनें।
जिम जाकर कसरत न कर सकें तो पैदल चलना, साइकल चलाना, तैरना, जॉगिंग को प्रतिदिन दिनचर्या में शामिल करें।
बैडमिंटन/क्रिकेट खेलना या सीढ़ी चढ़ने जैसी गतिविधियां भी बहुत काम आ सकती हैं।
हृदय रोग है या हड्डियों की समस्या है तो एरोबिक से बचना चाहिए, पर किसी न किसी रूप में कसरत अवश्य करें। चिकित्सक की सलाह से मांसपेशियों को सक्रिय रखें।
कैसा हो खानपान
शारीरिक स्थिति यानी वजन व सक्रियता के आधार पर आहार का ध्यान रखें।
आहार में प्रोटीन का समावेश आवश्यक है जो अक्सर अनदेखा रह जाता है।
अगर 60 की उम्र है, तो आपको हर रोज 55 से 60 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए।
दिन के तीनों आहार में बीस-बीस-बीस के अनुपात में प्रोटीन लेना मांसपेशियों की क्षमता को बढ़ाने में असरकारक है। यह मांसपेशियों की टूट-फूट रोकने में मदद करता है।
नाश्ता करना न छोडे़ं। इससे दिनभर के लिए जरूरी पोषण मिल जाता है। नाश्ते में खासतौर से अंडे, साबुत अनाज, फल और डेरी उत्पाद को शामिल करें।
न्यूट्रीशन सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ मजबूत मांसपेशियां बनाने के लिए हेल्दी और बैलेंस डाइट लेने के बावजूद भी कुछ पोषण-संबंधी कमियां रह जाती हैं। इन कमियों को दूर करने के लिए चिकित्सक की सलाह पर न्यूट्रीशन सप्लीमेंट्स ले सकते हैं।
Source:
https://www.jagran.com/lifestyle/health-know-what-is-sarcopenia-which-increases-the-risk-of-type-2-diabetes-23683159.html




