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23 March, 2024, 05:33 AM
सिर में लगातार दर्द दे सकता है इस गंभीर बीमारी को न्यौता, समय रहते हो जाएं सतर्क
ब्रेन ट्यूमर एक जानलेवा बीमारी है, जो हर उम्र के लोगों को अपनी चपेट में ले रही है.
ब्रेन ट्यूमर, एक ऐसा शब्द जो सुनते ही मन में डर पैदा हो जाता है. यह एक जानलेवा बीमारी है, जो हर साल लाखों लोगों की जान लेती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 2020 में दुनिया भर में तीन लाख से ज्यादा लोग ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित थे. यह बीमारी बच्चों से लेकर हर उम्र के लोगों में देखी जा रही है.
मस्तिष्क या उसके आसपास की कोशिकाओं के बढ़ने से ब्रेन ट्यूमर हो सकता है. यह समस्या सेल्स में होने वाली अनियंत्रित वृद्धि के कारण होती है. यह ट्यूमर कैंसर और नॉनकैंसर का कारक हो सकता है. हालांकि ट्यूमर बढ़ने से मस्तिष्क में प्रेशर बढ़ने लगता है. इससे ब्रेन के डैमेज होने का रिस्क काफी हद तक बढ़ सकता है. इसका समय रहते इलाज न कराने से यह मौत का कारण बन सकती है.
क्या होता है ब्रेन ट्यूमर?
ट्यूमर दो प्रकार के होते हैं, जिसमें प्राथमिक मस्तिष्क ट्यूमर और मेटास्टैटिक मस्तिष्क ट्यूमर शामिल हैं. प्राथमिक मस्तिष्क ट्यूमर में ट्यूमर मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में ही पैदा होते हैं, जो कैंसर और नॉनकैंसर हो सकते हैं. वहीं, मेटास्टैटिक मस्तिष्क ट्यूमर शरीर के अन्य भागों में उत्पन्न कैंसर कोशिकाओं के मस्तिष्क में फैलने से बनते हैं. इसके कई कारण हो सकते हैं, जिसमें अनहेल्दी खाना, खराब लाइफस्टाइल और आनुवांशिक गुण शामिल है.
ब्रेन ट्यूमर के कारण
ब्रेन ट्यूमर की संभावना तब बढ़ती है, जब मस्तिष्क या उसके पास की कोशिकाओं के डीएनए में परिवर्तन होता है. यह परिवर्तन कोशिकाओं को अनियंत्रित रूप से बढ़ने और अलग होने का कारण बनता है, जिसके कारण ट्यूमर बनता है. कुछ जानलेवा कारक ब्रेन ट्यूमर के खतरे को काफी हद तक बढ़ाने में मददगार होते हैं. इसके अलावा केमिकल्स के प्रभाव के कारण भी इसका जोखिम बढ़ सकता है. रेडिएशन, जैसे एक्स-रे और रैडियोथेरेपी के संपर्क में आने से ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा हो सकता है.
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण
लगातार सिरदर्द होना ट्यूमर का सबसे आम लक्षण है, जो अक्सर सुबह में बदतर होता है और खांसी या झुकने से बढ़ सकता है.
सिरदर्द के कारण मतली और उल्टी हो सकती है. इसके अलावा इंट्राक्रैनील के बढ़ते दबाव के कारण भी यह समस्या हो सकती है.
मस्तिष्क में असामान्य गतिविधि के कारण दौरा पड़ने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है.
ट्यूमर की समस्या होने पर सुनने में कमी या बहरापन भी हो सकता है.
चलने में परेशानी, गिरना या चक्कर आना भी इसका लक्षण हो सकता है.
ट्यूमर होने पर बोलने में धीमापन, शब्दों का गलत उच्चारण या समझने में कठिनाई हो सकती है.
चिड़चिड़ापन अवसाद या स्मृति समस्याएं होना इसका आम कारण है.
ट्यूमर की समस्या होने पर मांसपेशियां कमजोर हो जाती है, जिससे लकवा होने का खतरा रहता है.
ब्रेन ट्यूमर का इलाज
सर्जरी
यह ट्यूमर को हटाने का सबसे आम तरीका है. इसमें क्रैनीओटॉमी, स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी, कीमोथेरेपी और ब्रेकीथेरेपी शामिल है. क्रैनीओटॉमी खोपड़ी में एक छेद बनाकर ट्यूमर को हटाने की प्रक्रिया है. वहीं, स्टीरियोटैक्टिक उच्च ऊर्जा वाले विकिरण किरणों का इस्तेमाल करके ट्यूमर को नष्ट करने की एक गैर-इनवेसिव प्रक्रिया है. इसके अलावा कीमोथेरेपी दवाओं का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को मारने का एक तरीका है. कीमोथेरेपी को गोलियों, इंजेक्शन या रीढ़ की हड्डी में दवा इंजेक्ट करके दिया जा सकता है. ब्रेकीथेरेपी को बाहरी बीम विकिरण चिकित्सा से अलग बताया जा सकता है, जहां विकिरण को शरीर के बाहर एक मशीन से कैंसर कोशिकाओं तक पहुंचाया जाता है.
ब्रेन ट्यूमर से बचाव
धूम्रपान करने से कुछ प्रकार के ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए धूम्रपान करने से परहेज करें.
रेडिएशन के संपर्क में आने से बचें.
स्वस्थ भोजन खाएं, नियमित रूप से व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें.
Source:
https://www.india.com/hindi-news/health/significance-brain-tumor-causes-symptoms-treatment-in-hindi-6805720/




