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क्या होता है Down Syndrome? जानें इस बीमारी के कारण और लक्षण

9 March, 2024, 07:40 AM

क्या होता है Down Syndrome? जानें इस बीमारी के कारण और लक्षण

डाउन सिंड्रोम एक ऐसा विकार है, जिसके कारण शरीर और दिमाग के विकास में देरी हो सकती है.
डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक डिसॉर्डर है. इसके होने की संभावना तब बढ़ जाती है, जब किसी व्यक्ति में 21वें गुणसूत्र की एक्स्ट्रा कॉपी होती है. यह एक जन्मजात विकार है, जिसका मतलब है कि यह बच्चे के जन्म से पहले ही मौजूद होता है. डाउन सिंड्रोम को ‘ट्राइसोमी’ के नाम से भी जाना जाता है. ऐसी कंडीशन में बच्चे का मानसिक और शारीरिक तौर पर विकास नहीं हो पाता है.

डाउन सिंड्रोम के कारण बच्चे के शारीरिक विकास में देरी होने के साथ-साथ चेहरे की विशेषताओं में भी फर्क देखने को मिलता है. इसकी वजह से थाइरॉइड और दिल से जुड़ी बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है.

आइए जानते हैं इस बीमारी के कारण के बारे में
डाउन सिंड्रोम के कारण
रिप्रोडक्शन के समय माता-पिता के क्रोमोसोम बच्चे तक पहुंचते हैं. इसमें टोटल 46 क्रोमोसोम होते हैं, जिसमें से 23 माता और 23 पिता से बच्चे को मिलते हैं. जब माता-पिता के क्रोमोसोम आपस में मिलते हैं, तो इस दौरान 21 वें क्रोमोसोम का डिविजन नहीं होने के कारण 21 वां क्रोमोसोम अपनी एक्स्ट्रा कॉपी बना देता है. इसे ट्राइसॉमी-2 कहा जाता है. इसके कारण बच्चे में कई शारीरिक और मानसिक विकार पैदा होते हैं. अमेरिका में डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों की संख्या ज्यादा देखने को मिलती है. नेशनल डाउन सिंड्रोम सोसायटी के मुताबिक, अमेरिका में 700 बच्चों में से एक बच्चा डाउन सिंड्रोम से ग्रसित होता है.
ट्राईसॉमी

हर कोशिका में गुणसूत्र 21 की एक एक्स्ट्रा कॉपी होती है, जिसे ट्राइसॉमी-21 कहते हैं. इसे डाउन सिंड्रोम का सबसे आम रूप माना जाता है.

मोजेक डाउन सिंड्रोम
यह तब होता है, जब किसी व्यक्ति के शरीर में कोशिकाओं के दो या इससे ज्यादा आनुवंशिक रूप से भिन्न सेट देखने को मिलते हैं.

ट्रांसलोकेशन

इस तरह के डाउन सिंड्रोम में 46 क्रोमोसोम में से बच्चों में क्रोमोसोम 21 का केवल एक एक्स्ट्रा भाग पाया जाता है.

डाउन सिंड्रोम के लक्षण
आमतौर पर डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में जन्म के समय में कुछ अलग तरह के लक्षण दिखाई देते हैं, जिसमें फ्लैट चेहरा, उभरी हुई जीभ, बादाम शेप आंखें, हाथों में लकीरें, सिर, कान, उंगलियां छोटी और चौड़ी होना शामिल है. इसके अलावा बच्चों की हाइट कम हो सकती है.
इस बीमारी से पीड़ित बच्चों का मानसिक और सामाजिक विकास दूसरे बच्चों की तुलना में देरी से होता है, इसलिए ये बच्चे सामान्य बच्चों से अलग व्यवहार करते हैं.
ऐसे बच्चों में सही निर्णय नहीं लेने की संभावना ज्यादा होती है. इनमें एकाग्रता की कमी होने की वजह से डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चे में सीखने की क्षमता सामान्य बच्चों की अपेक्षा बहुत कम होती है.
डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे बच्चों में दिल से जुड़ी समस्याएं, कमजोर आंखें, मोतियाबिंद, ल्यूकीमिया, बहरापन, मोटापा, कब्ज, सांस लेने में दिक्कत, हाइपोथायरायडिज्म, दांतों के विकास में देरी होने की संभावना होती है.
डाउन सिंड्रोम के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन, यूरीनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन और स्किन इन्फेक्शन जैसी प्रॉब्लम होती है
वैसे तो इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, लेकिन कई तरह के शैक्षिक कार्यक्रम के माध्यम से इससे पीड़ित लोगों को समझने और सक्षम बनाने में मदद मिल सकती है. एनडीएसएस यानी नेशनल डाउन सिंड्रोम सोसायटी में 300 से ज्यादा स्थानीय डाउन सिंड्रोम संगठन हैं, जो अपने स्थानीय क्षेत्र में इस बीमारी से पीड़ित लोगों को बेहतर सेवा देने में मददगार साबित होते हैं.







Source:

https://www.india.com/hindi-news/health/down-syndrome-causes-and-symptoms-6774189/
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