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जन स्वास्थ्य की चुनौतियाँ और होम्योपैथी

7 June, 2015, 01:24 AM

जन स्वास्थ्य की चुनौतियाँ और होम्योपैथी

देश की लगभग 50 प्रतिशत किशोरियाँ एवं महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हैं और एक साल से 10 वर्ष तक के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. नवजात शिशुओं की मौत का कारण कम वजन, दस्त रोग, निमोनियां एवं अन्य प्रकार के संक्रमण हैं... झाँसी होम्योपैथिक संघ के तत्वाधान में ‘जन स्वास्थ्य की चुनौतियाँ और होम्योपैथी’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी कार्यालय लहरगिर्द में किया गया. संगोष्ठी का शुभारम्भ मुख्य अतिथि, केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद, भारत सरकार के वरिष्ठ सदस्य डॉ. अनुरूद्ध वर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर एवं हैनीमैन के चित्र पर माल्यार्पण कर किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आजादी के लगभग 65 वर्षों बाद भी देश में जन स्वास्थ्य की स्थिति संतोषजनक नहीं है. अभी भी महिलाओं में प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं तथा नवजात शिशुओं एवं बच्चों की रूग्रढ़ता तथा मृत्युदर को कम करने में अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं हुयी है. देश की लगभग 50 प्रतिशत किशोरियाँ एवं महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हैं और एक साल से 10 वर्ष तक के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. नवजात शिशुओं की मौत का कारण कम वजन, दस्त रोग, निमोनियां एवं अन्य प्रकार के संक्रमण हैं. डॉ. वर्मा ने कहा कि लाइफ स्टाइल डिसीजेज, संक्रमण रोग, महामारी, नशे की लत, मलेरिया, पर्यावरण प्रदूषण से उत्पन्न होने वाली गम्भीर स्वास्थ्य समस्याऐं जन स्वास्थ्य के समक्ष चुनौती बनकर खड़ी हैं. उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिये होम्योपैथी पूरी तरह सक्षम और पर्याप्त है. जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. डीएस सचान ने कहा कि होम्योपैथी 80 प्रतिशत स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में कारगर है, क्योंकि यह रोगी के शारीरिक, मानसिक एवं जीवनशैली को दृष्टिगत रखते हुये रोगी का उपचार करने में मदद करती है. वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. एसी भारद्वाज ने कहा कि होम्योपैथिक औषधियाँ शरीर के स्व प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत करती हैं जिससे व्यक्ति रोग से लड़ने में सक्षम हो जाता है. युवा होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. केएस सचान ने कहा कि होम्योपैथी माँ एवं शिशु के देखभाल के क्षेत्र में कारगर है. यहाँ तक कि यह गर्भावस्था के दौरान अनेक रोगों के उपचार में सफलतापूर्वक प्रयोग की जा सकती है. महिला होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रचना श्रीवास्तव ने कहा कि एनीमियां, कुपोषण, दस्त रोग, निमोनिया, खसरा आदि के बचाव एवं उपचार में होम्योपैथिक औषधियों के पर्याप्त, पुख्ता पं्रमाण उपलब्ध हैं. डॉ. निरूपमा सचान ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उल्टी होना, पैरों में सूजन, अचानक रक्तचाप बढ़ना, खून की कमी, मानसिक चिन्ता का होम्योपैथिक औषधियों से सफलतापूर्वक इलाज किया जाता है. डॉ. आरएसएस बुन्देला ने कहा कि होम्योपैथी में स्वाइन फ्लू, डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया, चिकिनपाक्स, जापानी इन्सिफिलाइटिस आदि के बचाव एवं उपचार की होम्योपैथिक औषधियों उपलब्ध हैं. संगोष्ठी को डॉ. आरके उपाध्याय, डॉ. पूनम बुधरानी, डॉ. संजय रायकवार, डॉ. केदार सेठ, डॉ. मानव अरोरा आदि ने संबोधित किया. संगोष्ठी का संचालन डॉ.सुनील दीक्षित ने किया तथा आभार डॉ- डीएस सचान ने व्यक्त किया.

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