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1 June, 2015, 12:23 AM
तेज à¤à¥‚ख लगने पर ना खाà¤à¤‚ "कà¥à¤› à¤à¥€"
"ऎसे में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ डाइट लें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसे पचने में समय लगता है और बार-बार à¤à¥‚ख नहीं लगती।" आपने गौर किया होगा कà¤à¥€-कà¤à¥€ तेज à¤à¥‚ख लगने पर कà¥à¤› à¤à¥€ खाने का मन करता है लेकिन ऎसे में कà¥à¤› à¤à¥€ खाना कई बार मोटापे, बदहजमी, अपच जैसे रोगों का कारण बनता है। इसलिठजब à¤à¥€ à¤à¥‚ख लगे तो कà¥à¤› ऎसा आहार खाà¤à¤‚ कि यह à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ थोड़ी देर के लिठथम जाठऔर कोई नà¥à¤•सान à¤à¥€ न हो। à¤à¥‚ख का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• के हाइपोथैलेमस नामक हिसà¥à¤¸à¥‡ में तब शà¥à¤°à¥‚ होता है जब यह विशेष पà¥à¤°à¤•ार के हारà¥à¤®à¤¾à¥‡à¤¨ छोड़ता है। à¤à¥‚ख का à¤à¤• आवेग करीब 30 सेकंड तक रहता है और यह लगातार 30-45 मिनटों तक होता रहता है। इसके बाद à¤à¥‚ख 30-150 मिनटों तक कम हो जाती है। à¤à¥‚ख की तीवà¥à¤°à¤¤à¤¾ जितनी अधिक होगी, पाचन-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ उतनी ही मजबूत होगी। पाचन-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ ठीक होगी तो रकà¥à¤¤ à¤à¥€ सही मातà¥à¤°à¤¾ में बनेगा। यह संतà¥à¤²à¤¨ बना रहे इसके लिठपाचन कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को मजबूत बनाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करना चाहिà¤à¥¤ पानी मे कटौती न करें पानी शरीर को अंदर से साफ कर अधिक खाने से रोकता है। कई बार तो लोग à¤à¥‚लवश पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ को à¤à¥‚ख समà¤à¤•र अतिरिकà¥à¤¤ खा लेते हैं जबकि मातà¥à¤° पानी पीकर ही उनका काम चल सकता है। अगली बार जब आपको à¤à¥‚ख लगे और खाने का समय न हो तो à¤à¤• गिलास पानी पीकर देख लें। फासà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग लंबी न हो दो बार के खाने के बीच जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ अंतराल नहीं होना चाहिà¤à¥¤ गैप जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होने से à¤à¥‚ख अधिक लग सकती है और उस समय कà¥à¤› à¤à¥€ खाने का मन करता है। इसके सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर हर चार घंटे के बाद कोई हैलà¥à¤¦à¥€ नाशà¥à¤¤à¤¾ जैसे फल, अंकà¥à¤°à¤¿à¤¤ अनाज, उपमा, इडली, डोसा या सूखे मेवे खाठजा सकते हैं। धीरे-धीरे खाà¤à¤‚ अगर हर समय à¤à¥‚ख लगती रहती है और आप जलà¥à¤¦à¥€-जलà¥à¤¦à¥€ खाना खाते हैं तो धीरे-धीरे, चबाकर खाà¤à¤‚। इससे आपका खाना पेट में जाकर अचà¥à¤›à¥€ तरह पचेगा और उसके सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µ शरीर को ऊरà¥à¤œà¤¾ देगें, जिससे थोड़ी-थोड़ी देर में à¤à¥‚ख लगने की समसà¥à¤¯à¤¾ दूर हो जाà¤à¤—ी। इसके अलावा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चाय पीने से बचें। इससे à¤à¥‚ख मर जाती है लेकिन कà¥à¤› समय के बाद फिर से खाने की इचà¥à¤›à¤¾ होने लगती है। चाय पीने से बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल बढ़ जाता है और बार-बार खाने का दिल करने लगता है। काइजेन डाइट à¤à¥€ है उपाय जापानी सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त काइजेन पर आधारित जेन डाइट अपने आप में अनोखी है। काइजेन का अरà¥à¤¥ है सà¥à¤§à¤¾à¤°à¥¤ इस डाइट में आप अपना à¤à¥‹à¤œà¤¨ बहà¥à¤¤ समà¤à¤¦à¤¾à¤°à¥€ से चà¥à¤¨à¤¤à¥‡ और खाते हैं। इसके लिठआपको चीनी, पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸à¥à¤¡ फूड और तले-à¤à¥à¤¨à¥‡ से बिलà¥à¤•à¥à¤² परहेज या इसकी नà¥à¤¯à¥‚नतम मातà¥à¤°à¤¾ लेनी होती है ताकि बढ़े हà¥à¤ वजन को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने में मदद मिल सके। लेकिन इसे विशेषजà¥à¤ž की सलाह के बाद ही फॉलो करना चाहिà¤à¥¤ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र हो डाइट à¤à¥‹à¤œà¤¨ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ को सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ अवशà¥à¤¯ दें। शरीर को कारà¥à¤¬à¤¾à¥‡à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और वसा पचाने में कम समय लगता है जबकि पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ पचाने में अधिक समय लगता है। पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ खाने के बाद हमें पेट à¤à¤°à¥‡ रहने का अनà¥à¤à¤µ होता है जिससे बाद में जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¥‚ख नहीं लगती। फाइबर होता है महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ फाइबर या रेशे से à¤à¤°à¤ªà¥‚र अनाज, सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और फल पाचन में अधिक समय लेते हैं जबकि मैदा से बने खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ और बिसà¥à¤•िट आदि जलà¥à¤¦à¥€ पच जाते हैं व हमे जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¥‚ख लग आती है। यही वजह है कि आप पटेटो चिपà¥à¤¸ के कई पैकेट à¤à¤• साथ खा सकते हैं लेकिन अधिक फल-सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ नहीं। इसलिठà¤à¥‹à¤œà¤¨ में सलाद व मौसमी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ अवशà¥à¤¯ शामिल करें। à¤à¥‚ख लगने पर जूस पीने की बजाय फल खाà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि रस निकालने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के दौरान रेशे निकल जाते हैं और फाइबर न होने से हमेें इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पीने के फौरन बाद ही à¤à¥‚ख लगने लगती है। - See more at: http://www.patrika.com/news/diet-fitness/check-your-food-before-eat-1044451/#sthash.GryW0u0Q.dpuf
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