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11 April, 2021, 02:08 AM
आंतों में भी हो सकती है टीबी:दस्त-बुखार करता है आंतों में टीबी होने का इशारा, ज्यादातर मरीजों में पानी की कमी हो जाती है; जानिए इससे कैसे निपटें
ज्यादातर लोगों को लगता है, टीबी सिर्फ फेफड़ों में ही होती है, लेकिन ऐसा नहीं है। टीबी आंतों में भी हो सकती है। आंतों की टीबी के ज्यादातर मामलों की वजह माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नाम का बैक्टीरिया होता है। कुछ मामलों यह माइकोबैटीरियम बोविस बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण भी होता है।
आज वर्ल्ड टीबी-डे है, SMS हॉस्पिटल, जयपुर के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर महर्षि से जानिए क्या है आंतों की टीबी और इससे बचने का तरीका....
सबसे पहले जानिए, कब होता है आंतों में टीबी
यह दो स्थिति में होता है। पहली, टीबी के बैक्टीरिया से संक्रमित खाना खाने पर। दूसरी, फेफड़े की टीबी की स्थिति में मरीज द्वारा खुद का बलगम निगलने से। एड्स और कैंसर के मरीज के अलावा जिन लोगों की रोगों से लड़ने की क्षमता कम होती है, उनमें आंतों की टीबी होने का खतरा ज्यादा रहता है।
तीन तरह की होती है आंतों की टीबी
यह टीबी आंत के किसी भी हिस्से में हो सकती है, लेकिन 75 फीसदी लोगों में यह छोटी आंत के अंतिम हिस्से में होती है। ऐसा होने पर आंत में सूजन आ जाती है। शुरुआती अवस्था में इसका इलाज न होने पर यह जानलेवा साबित हो सकती है। यह बीमारी तीन तरह की होती है-
अल्सरेटिव: इसमें आंतों में अल्सर की स्थिति बनती है। यह 60 फीसदी मरीजों में होती है।
हाइपरट्रॉफिक: टीबी के इस प्रकार में आंतों की वॉल मोटी और सख्त हो जाती है। आंतों में रुकावट आ जाती है। यह 10 फीसदी मरीजों में होती है।
अल्सरेटिव हाइपरट्रॉफिक: ऐसी स्थिति में आंतों में अल्सर और रुकावट दोनों होती हैं। आंतों की टीबी के मरीजों में 30 फीसदी मामले ऐसे होते हैं।
ये लक्षण दिखने पर अलर्ट हो जाएं
पेटदर्द, कब्ज होना, खूनी दस्त आना, बुखार रहना, भूख कम लगना, कमजोरी होना, वजन घटना और पेट में गांठ बनना इसके लक्षण हैं। इसके कुछ लक्षण दूसरी बीमारियों से मिलते-जुलते हैं। इसलिए कभी भी ऐसे लक्षण दिखें तो नजरअंदाज न करें और डॉक्टर्स से सलाह लें।
जांच और इलाज
खून की जांच, सीने व पेट का एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, मेंटॉस टेस्ट से आंतों में टीबी की जांच की जाती है। इसके अलावा कोलोनोस्कोपी और बायोप्सी से भी टीबी की जांच करते हैं। कुछ मरीजों में एंडोस्कोपी की जरूरत भी पड़ती है।
डॉ. सुधीर कहते हैं, आंतों में टीबी के मरीज ज्यादातर दस्त से परेशान होते हैं। ऐसे में सबसे शरीर में लिक्विड और मिनरल्स की कमी पूरी करने के लिए ओआरएस घोल देते हैं। इसके बाद एंटीमाइक्रोबियल दवाएं दी जाती हैं ताकि बैटीरिया नष्ट हों और संक्रमण खत्म किया जा सके। ऐसे मरीज जो उल्टी के कारण दवाएं नहीं ले पाते उन्हें इंजेक्शन के जरिए दवाइयां दी जाती हैं।
ऐसा हो खानपान: प्रोटीन वाली चीजें अधिक लें
आंतों में टीबी से परेशान मरीजों को खानपान में प्रोटीन अधिक लेना चाहिए। इसके लिए खानपान में दालें अधिक लें। इसके अलावा सूप, आलू, चावल, केला को डाइट में शामिल करें। इलाज की शुरुआत में दूध या इससे बनी चीजों को लेने से बचें, ये दस्त का कारण बनते हैं। इसके अलावा कॉफी, चाय, कोल्ड ड्रिंक्स से दूरी बनाएं, ये दस्त और पेटदर्द को बढ़ाती हैं। अल्कोहल न पिंए।
Source:
https://www.bhaskar.com/happylife/news/world-tb-day-2021-what-are-the-early-symptoms-of-tuberculosis-tb-128354239.html




