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AYUSH DOCTER - आयुष डॉक्टरों को लाइसेंस के लिए देनी पड़ेगी परीक्षा

26 January, 2018, 04:21 AM

AYUSH DOCTER - आयुष डॉक्टरों को लाइसेंस के लिए देनी पड़ेगी परीक्षा

होम्योपैथी और आयुर्वेद प्रैक्टिस करने के लिए मेडिकल स्नातकों को लाइसेंस प्राप्त करना होगा जिसके लिए उन्हें  एक एक्जिट परीक्षा देनी पड़ेगी। नेशनल मेडिकल कमिशन बिल में आयुर्वेद प्रैक्टिसनर के लिए यह कानून बनाने की तैयारी चल रही है। नए विधेयक का उद्देश्य होम्योपैथी और आयुर्वेद के लिए पहले से मौजूद दो अलग-अलग वैधानिक समितियों को हटाकर उसकी जगह एक नया रेगुलेटर  स्थापित करना है। नई वैधानिक समिति को नेशनल कमिशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसीन एंड होम्योपैथी के नाम से जाना जाएगा।

ब्रिज कोर्स से एलोपैथी प्रैक्टिस कर सकेंगे
आयुष मंत्रालय ने नीति आयोग के सुझाव के आधार पर विधेयक में सारी विधाओं को समाहित करने के लिए बिल में संशोधन किया है। नए संशोधन के बाद आयुष प्रैक्टिसनरों को भी एलोपैथी और एलोपैथिक प्रैक्टिसनरों को होम्योपैथी प्रैक्टिस करने की अनुमति मिलेगी। इसके लिए दोनों विधाओं के मेडिकल स्नातकों को एक ब्रिज कोर्स करना होगा। 

आयुर्वेद में शिक्षकों के लिए भी एनटीईटी
नीति आयोग द्वारा निर्मित नेशनल कमिशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसीन एंड होम्योपैथी विधेयक के पारित होने के बाद सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसीन  और सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी  को खत्म कर दिया जाएगा। इस विधेयक में होम्योपैथी और आयुर्वेद की विधाओं में योग्य शिक्षकों की भर्ती करने के लिए आयुष नेशनल टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट शुरू करने का भी निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार आयुष संस्थानों में सभी तरह के शिक्षकों की भर्ती के लिए आयुष नेशनल टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट  को आयोजन किया जाएगा।

नीट पास करना अनिवार्य
एमबीबीएस के बाद अब आयुष चिकित्सा कोर्स के लिए भी नीट अनिवार्य किया जा रहा है। आयुष विभाग के सचिव राजेश कटोच ने कहा कि अगले सत्र से आयुर्वेद, यूनानी, होम्योमैथी, सिद्ध आदि पैथियों की पढ़ाई में प्रवेश के लिए छात्रों को नीट टेस्ट पास करना होगा। कम से कम 50 फीसदी अंकों के साथ उन्हें नीट परीक्षा पास करनी होगी।  

वैद्यों के नुस्खों को परखेगा आयुर्वेद विभाग
आयुष मंत्रालय ने वैद्यों से कहा कि वे अपने परंपरागत चिकित्सा ज्ञान की जांच आयुर्वेद विभाग की प्रयोगशाला में कराएं। यदि वह सही पाया जाता है तो न सिर्फ सरकार उन्हें प्रमाण पत्र जारी करेगी बल्कि उनके ज्ञान का पेटेंट भी कराएगी। आयुष विभाग के सचिव डा. राजेश कटोच ने बताया कि एक परंपराग चिकित्सा ज्ञान वह है जो आयुर्वेद में वर्णित है। लेकिन ऐसा भी ज्ञान है जो वैद्य पीढ़ी दर पीढ़ी इस्तेमाल होता आ रहा है तथा वह कहीं लिखित में नहीं है। इस ज्ञान के लुप्त होने का खतरा है। क्योंकि हो सकता है नई पीढ़ी इसे अपना पेशा नहीं बनाए। इसलिए हमने वैद्यों के ज्ञान को वैज्ञानिक कसौटी पर परखकर उसे प्रमाणित और सुरक्षित करने का बीड़ा उठाया है। 




Source:

https://www.livehindustan.com/career/story-ayush-doctors-will-have-to-give-exam-for-license-1722442.html
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