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16 May, 2015, 05:24 AM
बेकाबू कà¥à¤°à¥‹à¤§ à¤à¤¸à¥‡ लाà¤à¤‚ काबू में डॉ. उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ कà¥à¤®à¤¾à¤° मनोरोग विशेषजà¥à¤ž
अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ कà¥à¤°à¥‹à¤§ à¤à¥€ à¤à¤• मनोरोग है, जिसका कारगर इलाज संà¤à¤µ है... खà¥à¤¶à¥€ व गम की तरह कà¥à¤°à¥‹à¤§ à¤à¥€ हमारी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं को वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करने का à¤à¤• जरिया है। जब सà¥à¤µà¤¯à¤‚ पर हमारे विवेक का पूरà¥à¤£ नियंतà¥à¤°à¤£ होता है, तो हम अपनी खà¥à¤¶à¥€, गम और यहां तक कि कà¥à¤°à¥‹à¤§ à¤à¥€ नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ रूप से सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤°à¥‚प ही वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करते हैं। कहने का आशय यह कि à¤à¤• विवेकपूरà¥à¤£ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को पता होता है कि उसे कहां कितनी खà¥à¤¶à¥€ जाहिर करनी है और किसके सामने रोना है या किस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में कितना कà¥à¤°à¥‹à¤§à¤¿à¤¤ होना है। जब हमारी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं पर सà¥à¤µà¤¯à¤‚ के विवेक का नियंतà¥à¤°à¤£ नहीं होता है, तब वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ में à¤à¤• विकृति पैदा हो जाती है, जिसे मनोचिकितà¥à¤¸à¤•ीय à¤à¤¾à¤·à¤¾ में à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• असà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ कहते हैं। à¤à¤¸à¥‡ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ बाहरी तौर से अपने मन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° माहौल में तो बड़े शालीन, सà¤à¥à¤¯ व शांत पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ होते हैं, लेकिन किसी à¤à¥€ विपरीत परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ (जो उनके मन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° नही है) में अचानक गंà¤à¥€à¤° रूप से कà¥à¤°à¥‹à¤§à¤¿à¤¤ होकर अपना आपा खो बैठते हैं और तà¥à¤°à¤‚त मारपीट व तोडफ़ोड़ पर à¤à¥€ आमादा हो जाते हैं। लकà¥à¤·à¤£ -कोई à¤à¥€ बात मन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° न होने पर रोगी को उलà¤à¤¨ होना और चाहकर à¤à¥€ उस बात को à¤à¥‚ल न पाना। - मन के विपरीत रोगी की किसी à¤à¥€ बात को मना करने पर या समà¤à¤¾à¤¨à¥‡ पर रोगी गंà¤à¥€à¤° रूप से कà¥à¤°à¥‹à¤§à¤¿à¤¤ हो जाते हैं और बहस करने लगते हैं। -à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं पर नियंतà¥à¤°à¤£ के अà¤à¤¾à¤µ में रोगी शांत नहीं हो पाते हैं और छोटा-बड़ा, अपना पराया व संबंधों की परवाह किठबगैर रोगी गंà¤à¥€à¤° रूप से दूसरे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ पर कà¥à¤°à¥‹à¤§ करने लगते हैं। - यदि दूसरा वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ अगर मनोरोगी को जवाब देता है, तो रोगी तà¥à¤°à¤‚त ही हाथापाई पर उतर आता है। रोगी तोडऩा-फोडऩा शà¥à¤°à¥‚ कर देता है। -à¤à¤¸à¥‡ में रोगी अपने हाथ व सिर को दीवार से टकरा सकते हैं और अकà¥à¤¸à¤° बà¥à¤²à¥‡à¤¡ या चाकू से अपनी कलाई à¤à¥€ चीर लेते हैं। गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾ शांत होने पर रोगी मन ही मन अपने किठपर पछताते हैं। अनà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ -रोगी को अकà¥à¤¸à¤° लगता है कि वह जितना दूसरों के लिठकरता है, उतना दूसरे उसके लिठनहीं करते। -लगातार उलà¤à¤¨ व तैश के चलते रोगी शराब व नींद की गोलियों व अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ार का नशा करने लगते हैं। -à¤à¤¸à¥‡ विसà¥à¤«à¥‹à¤Ÿà¤• सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ के चलते बार- बार उलà¤à¤¨ व हाथापाई की वजह से रोगी अपने मां-बाप व परिजनों के साथ नहीं रह पाते। विवाह के बाद à¤à¥€ अपने परिवार या पतà¥à¤¨à¥€ के साथ संबंध बिगाड़ लेते हैं। इलाज -चूंकि अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ कà¥à¤°à¥‹à¤§ रोगी का सामाजिक व वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¤¿à¤• जीवन पूरà¥à¤£à¤¤: नषà¥à¤Ÿ कर सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में उसका इलाज करना अनिवारà¥à¤¯ हो जाता है। -इलाज में मनोचिकितà¥à¤¸à¤¾ व दवाओं का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है। -मनोचिकितà¥à¤¸à¤¾ के दौरान रोगी को à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• असà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾, उलà¤à¥€ बातों से न उबर पाना और मन के विपरीत हर बात को गलत मानना जैसी बà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¥€ खामियों को पहचानने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया जाता है। इसके बाद रोगी à¤à¤¸à¥‡ दोषपूरà¥à¤£ वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° से बाहर निकलने की सही विधि का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करते हैं। -इस रोग में परिजनों को à¤à¥€ सलाह दी जाती है। परिजनों को रोगी से कà¥à¤¯à¤¾ बात कहनी है और कà¥à¤¯à¤¾ नहीं कहना है, ये सारी बातें मनोचिकितà¥à¤¸à¤• समà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। -रोगी को नशे से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ का à¤à¥€ इलाज किया जाता है। - मनोरोग विशेषजà¥à¤ž की सलाह पर ली गई दवाओं की सहायता से à¤à¤¸à¥‡ गंà¤à¥€à¤° व अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ कà¥à¤°à¥‹à¤§ पर कारगर रूप से काबू किया जा सकता है। डॉ. उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ कà¥à¤®à¤¾à¤° मनोरोग विशेषजà¥à¤ž - See more at: http://www.jagran.com/health/how-to-control-your-anger-12356104.html#sthash.A6xGujFu.dpuf
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