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8 April, 2016, 04:07 AM
सरकारी उपेक्षा का शिकार सरायकेला का आयुष केंद्र
झारखंड के सरायकेला में देसी चिकित्सा के उत्थान को लेकर सरकार का संकल्प केवल बयानों में ही दिखता है, पर हकीकत इससे जुदा है. सरायकेला जिले के आयुष केंद्र का हाल यही सच्चाई बयां करता है.
पूरे जिले के लिए बस 2561 रुपए की दवाएं
बीते तीन साल से दवा मद में आवंटन के बाद भी केवल रेट एप्रूव्ड नहीं होने के कारण जिले को दवा नहीं मिल पाई, हालांकि बड़ी मुश्किल से इस वर्ष आयुष विभाग को दवा मिली भी तो वह ऊंट के मुंह में जीरा की कहावत को चरितार्थ कर रही है. पूरे जिले के लिए केवल 2561 रुपए की आयुर्वेदिक दवा मिल सकी है.
यूनानी दवाएं इस साल भी नदारद
इस साल आयुष केंद्र में यूनानी दवा आया ही नहीं जबकि होम्योपैथी चिकित्सा हेतु तीन लाख रुपये की दवा आयी जरूर है, पर वह भी कुछ ही प्रकार की और खास समस्याओं के लिए ही.
पूरी स्थिति को लेकर सरायकेला तथा राज्य के भंडारपाल अशोक कुमार सिन्हा का कहना है कि हर साल रेट अप्रूव्ड नहीं होने के कारण आवंटन होने के बावजूद दवा नहीं खरीद होती है तथा पैसा लौट जाता है. इस बार भी आयुर्वेद की दवा मद की लगभग राशि वापस की जा रही है.
बहरहाल, अंग्रेजी चिकित्सा को लेकर सरकार नियमित रूप से स्वास्थ्य केन्द्रों की बेहतरी के लिए आधारभूत संरचना से लेकर दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु प्रयास करती है पर आयुष विभाग की ओर किसी का ध्यान नहीं होता. यहीं कारण है कि सरायकेला जिले में आयुष केन्द्र होने तथा डाक्टरों की मौजूदगी के बाद भी यहां दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होती है.
Source:
http://hindi.pradesh18.com/news/jharkhand/gumla/ayush-center-of-seraikella-neglected-in-jharkhand-1392429.html




