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Holi : 1954 के बाद आया ये अजब योग, जानिए

25 March, 2016, 02:41 AM

Holi : 1954 के बाद आया ये अजब योग, जानिए

"दो दिन पूर्णिमा और फिर सब कुछ आधा-आधा, तीसरे दिन आएगी भाई दूज, दो दिन तक गुलाल उड़ाने का मौका "
जबलपुर। रंगों के महापर्व होली के इंतजार की घडिय़ां बस समाप्त होने वाली हैं, लेकिन इस बार होली पर कुछ योग जुड़ रहे हैं। यूं कहें कि सब कुछ आधे-आधे दिन का है। तिथियों का यह खेल अलग अनुभव भी कराएगा। दरअसल इस बार पूर्णिमा दो दिन की है। प्रतिपदा यानी धुरेड़ी की सीमा भी दूसरे दिन को छू रही है। यानी दो दिन तक खूब होली मनाओ और दूसरे दिन की बजाय तीसरे दिन आ रही दूज के लिए बहनों से तिलक लगवाकर मीठा मुंह करो। पंचांग के जानकारों की मानें तो तिथियों में घट-बढ़ का यह योग सूर्य और चंद्रमा की गति के कारण बनता है। इस बार वर्ष 1954 में एेसी स्थिति बनी है कि धुरेड़ी का मुहूर्त द्वितीया तक आ गया है।
अल सुबह जलेगी होली
होलिकादहन के दिन को लेकर लोग भले ही असमंजस में हो, लेकिन ज्योतिषाचार्यों का मत स्पष्ट है। ज्योतिषाचार्य पं. जनार्दन शुक्ला के अनुसार 22 मार्च को व्रत पूर्णिमा और 23 तारीख को स्नान दान पूर्णिमा है। व्रत पूर्णिमा को देर तक भद्रा होने की वजह से होलिका दहन 22 मार्च को यानी मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात 3.29 बजे तक है। चूंकि होलिका दहन प्रतिपदा युक्त पूर्णिमा पर नहीं किया जाता, इसलिए 22 मार्च की रात ही होलिका दहन को शास्त्रोक्त माना जा रहा है।
दो दिन तक हुड़दंड
ज्योतिषाचार्य पं. शुक्ल के अनससाुर धुरेड़ी परमा यानी प्रतिपदा को मनाई जाती है। प्रतिपदा 23 मार्च को शाम 3.58 बजे से प्रारंभ होगी और 24 मार्च को शाम 5.55 बजे तक इसका मुहूर्त रहेगा। यानी 23 को चूक भी गए तो आप 24 तारीख को अपने अजीज को रंगों से रंग सकते हैं। इसी तरह द्वितीया का मुहूर्त 24 मार्च को शाम 5.55 बजे से प्रारंभ हो रहा है, जो 25 मार्च को पूरे दिन इसका मुहूर्त रहेगा। उदया तिथि पर 25 मार्च को भाई दूज मनायी जाएगी।
ये बना गले की फांस
होलिकादहन का मुहूर्त भले ही अल सुबह हो, लेकिन प्रशासन की सख्ती से कई जगह पर होलिका दहन मुहूर्त से पहले ही हो सकता है। शांति व कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने 22 को रात 12 बजे से पूर्व ही होलिका दहन कर लेने का फरमान जारी किया है। होली पर हुड़दंग की आशंका के चलते सार्वजनिक होलिकोत्सव पर पुलिस का कड़ा पहरा भी होगा। लोग सोच में पड़ गए हैं कि आखिर किया क्या जाए। जानकारों का कहना है कि अधिकांश स्थानों पर होलिका दहन रात बारह बजे से पूर्व ही हो जाएगा।

Source:

http://www.patrika.com/news/jabalpur/holi-since-1954-came-the-strange-yoga-know-1248271/
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