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डिहाइड्रेशन से होता है स्टोन, आयुर्वेद-होम्योपैथी से कर सकते हैं इलाज

12 May, 2015, 06:47 AM

डिहाइड्रेशन से होता है स्टोन, आयुर्वेद-होम्योपैथी से कर सकते हैं इलाज

बदलती लाइफस्‍टाइल के चलते खान-पान में आ रहे बदलाव कई बीमारि‍यों का कारण बन रहे हैं। ऐसे में किडनी में स्टोन का पाया जाना अब आम बीमारी हो गई है। गर्मी के दिनों में इसका अटैक 40 फीसदी तक बढ़ जाता है। डिहाइड्रेशन की वजह से भी किडनी में स्टोन होने की संभावना बढ़ जाती है, क्‍योंकि पसीना निकलने की वजह से शरीर में पानी की मात्रा कम होने लगती है। ऐसे में डॉक्‍टरों की मानें तो कि‍डनी में स्‍टोन को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहि‍ए। इसकी वजह से गुर्दे फेल होने की संभावना बढ़ जाती है। इस बारे में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के यूरोलॉजी वि‍भाग के प्रमुख प्रो. एसएन शंखवार का कहना है कि‍ जब भोजन में कैल्शियम, फॉस्फोरस और ऑक्जेलिक अम्ल की मात्रा अधिक होती है तो पथरी का निर्माण होने लगता है। इन तत्‍वों के सूक्ष्म कण मूत्र के साथ निकल नहीं पाते और कि‍डनी में एकत्र होकर पथरी की उत्पत्ति करते हैं। सूक्ष्म कणों से मिलकर बनी पथरी कि‍डनी में असहनीय पीड़ा को जन्‍म देती है। उन्‍होंने बताया कि कि‍डनी में स्‍टोन की बीमारी को लेकर आजकल 25 से 45 वर्ष आयु के ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में इसकी समस्या ज्यादा होती है। गर्म वातावरण में काम करने वाले लोगों में अधि‍क संभावना यूरोलॉजी वि‍भाग के असि‍स्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि जो लोग गर्म वातावरण में काम करते हैं, उनमें किडनी का स्टोन होने की संभावना सबसे अधिक होती है। तापमान में पांच से सात डिग्री के परिवर्तन से ही किडनी स्टोन के 30 फीसदी मामले बढ़ जाते हैं। स्टोन यूरिनरी ट्रैक के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन ज्यादातर यह किडनी या यूरेटर में पाया जाता है। स्टोन यूरिन में घुले हुए रसायनिक तत्वों के क्रिस्टल होते हैं। यह दाने के आकार के भी हो सकते हैं या फिर एक नींबू के आकार के भी होते हैं। कैल्‍शियम और यूरिक एसिड से होते हैं किडनी स्‍टोन उन्‍होंने बताया कि किडनी का स्टोन आमतौर से कैल्शियम और यूरिक एसिड की वजह से होते हैं, लेकिन 90 से 95 फीसदी कैल्शियम ऑक्ज्लेट की वजह से बनते हैं। किडनी में स्टोन के कोई लक्षण नहीं होते, जब तक कि वह यूरिनरी ट्रैक में रुकावट पैदा नहीं कर दे। जब इसमें रुकावट होती है तो यूरिनरी ट्रैक फैल जाती है और खिंचाव के कारण मांसपेशियों में ऐंठन शुरू होने लगती है। इस वजह से पेट के निचले हिस्से और किडनी में तेज दर्द होने लगता है।

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