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YOGA - योग का स्वतंत्र विभाग शुरू किया जाएगा: कुलपति

26 January, 2018, 04:56 AM

YOGA - योग का स्वतंत्र विभाग शुरू किया जाएगा: कुलपति

रांची विश्वविद्यालय में पीजी इन योगा पाठ्यक्रम की शुरुआत मंगलवार को हुई। लेक रोड स्थित वीसी कोठी में इसका उद्घाटन करते हुए कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि सेल्फ फाइनांसिंग पाठ्यक्रम के तहत अभी योग में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। लेकिन, विश्वविद्यालय की योजना इसे स्वतंत्र विभाग के रूप में स्थापित करने की है। इस संबंध में एक प्रस्ताव सीनेट व सिंडिकेट से स्वीकृत करा कर राज्य सरकार से पास भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि योग को स्नातक स्तर भी पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना है। साथ ही, योग का तीन माह सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किया जाएगा।

प्रतिकुलपति डॉ कामिनी कुमार ने कहा कि संचालन के लिए वीसी कोठी में तात्कालिक व्यवस्था की गई है। बाद में इसे नए भवन में शिफ्ट किया जाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों की संख्या और रुझान को देखते हुए योग की कक्षाओं का संचालन दो शिफ्टों में किए जाने की बात कही। प्रतिकुलपति ने कहा कि पीजी योगा की कक्षाओं की परिकल्पना बेंगलुरु स्थित स्वामी विवेकानंद योग संस्थान की तर्ज पर की गई है। योग में रिसर्च की तरफ भी रांची विश्वविद्यालय के प्रयास से जारी है।

60 विद्यार्थियों से हुई शुरुआत

रांची विश्वविद्यालय में पीजी इन योगा पाठ्यक्रम की शुरुआत 60 विद्यार्थियों से की गई है। किसी भी संकाय के स्नातक उत्तीर्ण विद्यार्थी इस पाठ्यक्रम में नामांकन ले सकते हैं। अभी इसकी कक्षाएं सुबह 8.00-11.30 बजे तक लेक रोड स्थित वीसी कोठी में संचालित होंगी। पाठ्यक्रम की निदेशक हैं डॉ टुलू सरकार और पाठ्यक्रम समन्वयक हैं- डॉ आनंद ठाकुर। सिलेबस तैयार करने में डीएसडब्लयू डॉ पीके वर्मा, विभूति भूषण राय और मनोज सोनी की अहम भूमिका रही।

आरयू में क्यूसीआई की परीक्षा आयोजित होगी

मौके पर कुलपति ने घोषणा की कि रांची विश्वद्यालय में आयुष मंत्रालय की क्यूसीआई (क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया) की परीक्षा भी आयोजित की जाएगी। भारत में जितनी भी तरह की योग विधाएं हैं उनको एक सूत्र में पिरोने के लिए आयुष मंत्रालय तीन स्तरीय परीक्षा आयोजित करता है। क्यूसीआई परीक्षा का बिहार-झारखंड में कोई सेंटर नहीं है। रांची विश्वविद्यालय में पीजी योगा की शुरू होने के मद्देनजर क्यूसीआई पूर्वी क्षेत्र के दो नोडल अधिकारी निदेशक भोजराज सिंह और समन्वयक रीतेश कुमार कुलपति से मिले। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि रांची विश्वविद्यालय में क्यूसीआई की लिखित और प्रायोगिक परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। आयुष मंत्रालय ने टीसीएस को प्लेसमेंट का जिम्मा दिया है। भोजराज सिंह ने बताया कि क्यूसीआई का दो लेवल क्वालीफाई करनेवालों का प्लेसमेंट राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में होता है। केंद्रीय विद्यालयों में योग शिक्षक नियुक्ति में क्यूसीआई को अनिवार्य बना दिया गया है।

विद्यार्थियों ने दिखाए योग के करतब

मौके पर पीजी योगा के विद्यार्थियों ने योग प्रशिक्षक व छात्र चंदन कुमार मिश्रा के नेतृत्व में योग के कई करतब दिखाए। उन्होंने योग के ध्यान, प्राणायाम और आसनों की प्रस्तुति देकर योग की विविधता दिखाई। मौके पर डीएसडब्ल्यू डॉ पीके वर्मा, सीसीडीसी डॉ गिरजा शंकर नाथ शाहदेव, रजिस्ट्रार एके चौधरी, पीएन सिंह, विभूति भूषण राय समेत अन्य मौजूद थे।

आरयू में शुरू होगा फॉरेन लैंग्वेज विभाग

योग पाठ्यक्रम का उद्घाटन करने के क्रम में कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि जल्द रांची विश्वविद्यालय में फॉरेन लैंग्वेज सेंटर भी खुलेगा। जहां विद्यार्थी विदेशी भाषाओं का सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि अभी इस सिलसिले में दिल्ली में उनकी वार्ता जापानी फाउंडेशन के साथ हुई है। जापानी भाषा की पढ़ाई रांची विश्वविद्यालय में अगले सत्र से शुरू करने की योजना है। इसके अलावा, चीजी, जर्मन, फ्रेंच आदि भाषाओं के भी सटिर्फिकेट और डिप्लोमा कोर्स शुरू करने की योजना है।

फिर जीएंगे छात्र जीवन

सुरेश ठाकुर : 1986 के बाद फिर से छात्र जीवन जीने का मौका मिला है। 30 वर्षों से योगाभ्यास कर रहा हूं, लेकिन कोई डिग्री नहीं थी। रातू में 5000 बच्चों को नि:शुल्क योग का प्रशिक्षण देता हूं। रांची विश्वद्यालय ने अच्छा अवसर दिया है।

भारतीय छड़ी : मुझे 32 वर्षों के बाद फिर से छात्रा बनकर कितनी खुशी मिली है, उसे व्यक्त नहीं कर सकती। यहां से योग की डिग्री लेकर, योग प्रशिक्षक के रूप में करियर बनाना चाहती हूं।

रजनी बक्शी : गुरु नानक स्कूल में योग टीचर हूं। राष्ट्रीय स्तर की योग कोच हूं। पर योग में डिग्री नहीं थी। यहां डिग्री प्राप्त करने के लिए नामांकन लिया है। सभी प्रशिक्षक बहुत मंजे हुए हैं।

चंदन कुमार मिश्रा : योग में पीजी करने के लिए कई राज्यों में गया। योग प्रशिक्षक तो हूं पर डिग्री नहीं थी। रांची विश्वविद्यालय ने अच्छा मौका दिया है। उम्मीद है कि एमफिल और पीएचडी की भी शुरुआत होगी।

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